केजरीवाल नहीं हो सकते दिल्ली के मुख्यमंत्री का चेहरा 

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल का बार बार यह कहना कि भाजपा यह बताए कि मुख्यमंत्री का चेहरा कोन होगा, यह चिचित्र है। वे खुद को मुख्यमंत्री का चेहरा प्रस्तुत कर रहे हैं लेकिन क्या वे इस बात का जवब दे सकते हैं कि जब सुप्रीम कोर्ट ने उनकी रिहाई किन शर्तों पर की है। न तो वे मुख्यमंत्री ऑफिस जा सकते है। 

न कोई सरकारी मीटिंग कर सकते हैं। न ही किसी पेपर पर साइन कर सकते हैं। अब जरा वह यह बताएं कि क्या कोई ऐसी हालत में मुख्यमंत्री बन सकता है। अगर वह इसके बाद भी खुद को मुख्यमंत्री पद का दावेदार मानते हैं तो इसका तात्पर्य्र सह हुआ कि वे पूरे दिल्ली की जनता को मूर्ख्र समझते हैं। 

अगर उनकी मैमरी कमजोर हो गई हे तो हम याद दिलाते हैं कि सुप्रीम कोर्ट्र ने क्या शर्ते रखी थी- 

  • सीएम कार्यालय में प्रवेश पर रोकः केजरीवाल को बिना दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी) की अनुमति के मुख्यमंत्री कार्यालय या सचिवालय में जाने की अनुमति नहीं है।
  • सरकारी फाइलों पर हस्ताक्षर नहीं कर सकतेः उन्हें किसी भी सरकारी फाइल पर हस्ताक्षर करने की इजाजत नहीं है।
  • सार्वजनिक बयान देने पर रोकः वे इस मामले से संबंधित किसी भी सार्वजनिक मंच पर बयान नहीं दे सकते।
  • गवाहों से संपर्क नहीं कर सकतेः उन्हें मामले से संबंधित किसी भी गवाह से बातचीत करने या संपर्क करने की अनुमति नहीं है।
  • ट्रायल कोर्ट में उपस्थित रहना होगाः उन्हें ट्रायल कोर्ट में सुनवाई के दौरान मौजूद रहना होगा जब तक कि व्यक्तिगत पेशी से छूट न मिले।

दरअसल अरविंद केजरीवाल हेनरी गोयबल्स के उस कथन पर ज्यादा ही भरोसा कर बैठे हैं कि अगर झूठ को बार बार दोहराया जाए तो वह सच बन जाता है। 

लेकिन उन्हें यह भी याद रखना चाहिए कि आप सबको हमेशा के लिए मूर्ख नहीं बना सकते हैं। दिल्ली की जनता दो बार उनके बहकावे में आ चुकी है। 

दिल्ली के ठग ने उनसे यमुना साफ करने का वादा किया था। उसने गाजीपुर ओर भलस्वा के कूड़े के पहाड़ को हटाने  का वादा किया था। 

केजरीवाल ने चुनाव प्रचार के दौरान यह वादा किया था कि वह यमुना नदी को साफ करेंगे और इसे डुबकी लगाने लायक बनाएंगे। उन्होंने यहां तक कहा था कि अगर वह पांच साल में इसे साफ नहीं कर पाए, तो उन्हें वोट न दिया जाए। 

हालांकि, यमुना आज भी प्रदूषण से भरी हुई है, और यह मुद्दा भाजपा द्वारा लगातार उठाया जा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा था कि हर घर में 24 घंटे पीने का साफ पानी पहुंचाएंगे। लेकिन आज भी कई क्षेत्रों में पानी की गुणवत्ता और उपलब्धता पर सवाल उठते हैं। कई दिल्लीवासियों को अभी भी पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।

उसने दिल्ली को पेरिस बनाने का वादा किया था। 

लेकिन क्या हुआ। दिल्ली और भी ज्यादा बदहाल हो गई। दिल्ली का जो भी आधारभूत ढांचा था, वह चरमरा गया। राजनीति में शूचिता की बात करने वाला आदमी आज शीशमहल में रह रहा है। गांधी के आदर्शों पर चलने की बात करने वाला आदमी आज जनता के कर के पैसे से मिनी बार बनवा रहा है। शराब घोटाले के पैसे से चुनाव लड़ना चाहता है। 

इसके बाद भी वह खुद को कट्टर ईमानदार कहता है। इससे बड़ा मजाक और क्या हो सकता है। 

इसलिए केजरीवाल जब खुद को मुख्यमंत्री का चेहरा बताते हैं तो वे ण्क तरह से देश के संविधान का भी मजाक उड़ाते हैं। एक आरोपी चुनाव में भाग तो ले सकता है।

 यह भी हो सकता है कि वह चुनाव जीत जाए। लेकिन अगर अदालत में वह अपराधी सिद्ध हो जाता है तो उसे पदत्याग करना होता है। 

देश में ऐसे कई उदाहरण मौजूद हैं। लेकिन केजरीवाल को इनसे कोई फर्क नहीं पड़ता है। उन्हें सिर्फ सत्ता चाहिए, चाहे वह किसी भी कीमत पर मिले। 

वे दिल्ली के लिए एक आपदा ही सिद्ध हुए हैं। 

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