केजरीवाल का हिंदू प्रेमः एक चुनावी छलावा

अरविंद केजरीवाल की राजनीति पूरी तरह से मुस्लिम तुष्टिकरण वाली रही है। बल्कि यह कहा जाए कि उनकी राजनीति हिंदु-विरोधी रही है तो गलत नहीं होगा। हिंदुओं के प्रति जो उनकी घृणा है, वह कई मौके पर परिलक्षित रही है। उन्हें हिंदुओं की कोई चीज अच्छी नहीं लगती है। लेकिन 2025 में जब उनहें हार का डर सता रहा है, तो वे चुनावी हिंदु हो गए हैं। 

उन्होंने हिंदु पुजारियों के लिए 18000 रुपए प्रति महीना सैलरी देने की घोषणा की है।  यही उन्होंने ग्रंथियों के लिए भी कहा है। सवाल यह है कि जब इमामों को ही वेतन बकाया है, तो हिंदु पुजारियों का क्या ही भला करेंगे। ि क्या यह प्रेम वास्तव में सच्चा है, या यह केवल एक चुनावी रणनीति है?

जब हम उनके बयानों और कार्यों का गहन विश्लेषण करते हैं, तो यह स्पष्ट होता है कि उनका हिंदू प्रेम केवल वोट बैंक की राजनीति तक सीमित है। चलिए उनके कुछ बयानों पर नजर उालते हैंः

बयानों की बेशर्मी

केजरीवाल ने एक बार कहा था, “भगवान राम एक आम आदमी थे।“ यह बयान न केवल हिंदू धार्मिक प्रतीकों का अपमान करता है, बल्कि यह दर्शाता है कि वे धार्मिक भावनाओं का मजाक उड़ाने में कोई संकोच नहीं करते। 

2015 में उन्होंने हिंदू धर्म में जातिवाद और भेदभाव की बात की, लेकिन क्या उन्होंने कभी अपने राजनीतिक दल के भीतर इस मुद्दे पर बात की? नहीं। यह केवल एक राजनीतिक हथकंडा था।  

दिवाली जैसे पवित्र त्योहार पर पटाखों पर प्रतिबंध लगाने का समर्थन करना, और फिर खुद दिवाली के समय अपने राजनीतिक लाभ के लिए इसका उपयोग करना यह उनकी दोहरी मानसिकता को दर्शाता है। 

जब उन्हें लगा कि हिंदू त्योहारों का विरोध करना उनके लिए फायदेमंद नहीं है, तो उन्होंने तुरंत अपना रुख बदल लिया।  

2017 में, जब गोहत्या पर विवाद बढ़ा, तो केजरीवाल ने कहा था कि “गाय की पूजा करने वाले लोग खुद गायों की देखभाल नहीं करतें ं ं 

राम मंदिरः केवल राजनीति

राम मंदिर निर्माण को लेकर उनका बयान कि “यह एक राजनीतिक मुद्दा है“ ने उन्हें कई हिंदू समर्थकों से आलोचना का सामना कराया। लेकिन क्या उन्हें वास्तव में राम मंदिर की चिंता है?

 बिल्कुल नहीं। उनका ध्यान केवल चुनावी लाभ पर है। जब चुनाव नजदीक आते हैं, तो वे अचानक से राम भक्त बन जाते हैं, लेकिन उनके पूर्व के बयानों से उनकी वास्तविक सोच उजागर होती है। ं

स्वस्तिक और सुदर्शन चक्र का अपमान  

स्वस्तिक जैसे पवित्र प्रतीक का अपमान करना और श्री कृष्ण के सुदर्शन चक्र को “जादू“ बताना उनके असली चेहरे को दिखाता है। क्या ऐसे व्यक्ति को हम सच में हिंदू प्रेमी मान सकते हैं? यह केवल दिखावा है।

वोट बैंक की राजनीति

जब चुनाव आते हैं, तो केजरीवाल अपने आपको एक ’राम भक्त’ के रूप में प्रस्तुत करते हैं। वे हनुमान चालिसा का भी जाप करने लगते हैं। लेकिन उनके काल में ही भयानक हिंदु-मुस्लिम दंगे हुए। जिसमें उनकी पार्टी के नेता ताहिर हुसैन और अमानुतुल्लाह खान का नाम उछला।  

सच तो यह हे कि उन्होंने हर मौके पर हिंदुओं को नीचा दिखाया है। वे जानते हैं कि हिंदू मतदाता कितने संवेदनशील होते हैं, और इसलिए वे इस संवेदनशीलता का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं।

अरविंद केजरीवाल का हिंदू प्रेम एक बड़ा धोखा है। यह केवल चुनावी लाभ प्राप्त करने के लिए किया गया एक दिखावा है। जब भी उन्हें लगता है कि उनका बयान या कार्य हिंदू समुदाय को नाराज कर सकता है, वे तुरंत अपनी रणनीति बदल लेते हैं। उनके बयानों और कार्यों की सच्चाई यही दर्शाती है कि उनका असली उद्देश्य केवल सत्ता में बने रहना है, न कि किसी धार्मिक या सांस्कृतिक मूल्य को सम्मान देना।

इसलिए, दिल्ली की जनता को इस छलावे से सावधान रहना चाहिए। केजरीवाल का हिंदू प्रेम सिर्फ एक राजनीतिक चाल है, और इसे पहचानना आवश्यक है ताकि हम अपने लोकतंत्र को सही दिशा में ले जा सकें।

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